Tehran गिरा नहीं, ‘मोजेक डिफेंस’ रणनीति ने अमेरिका-इजरायल को उलझाया

अजमल शाह
अजमल शाह

युद्ध में कभी-कभी ताकत जीतती है। लेकिन कई बार रणनीति ताकत को उलझा देती है। मिडिल ईस्ट के आसमान में मिसाइलें उड़ रही हैं, ड्रोन गूंज रहे हैं और सैन्य नक्शों पर लाल-नीली रेखाएं खिंच रही हैं।

Operation Epic Fury शुरू हुए दो हफ्ते हो चुके हैं। लक्ष्य साफ था ईरान की सैन्य क्षमता को झटका देना। लेकिन सवाल अब यह है कि इतने हमलों के बाद भी तेहरान क्यों नहीं टूटा?

जवाब एक सैन्य रणनीति में छिपा है जिसे कहा जाता है “Mosaic Defense”

इराक युद्ध से निकला सबक

ईरान की इस रणनीति की जड़ें 2003 के उस युद्ध में हैं जब अमेरिका ने इराक पर हमला किया था। उस समय इराक की सेना का कमांड ढांचा बेहद केंद्रीकृत था। हर आदेश सीधे सत्ता के शीर्ष से आता था। जब नेतृत्व टूट गया, तो पूरी सैन्य मशीनरी बिखर गई।

ईरानी सैन्य विश्लेषकों ने इस हार को सिर्फ घटना नहीं माना…उन्होंने इसे एक सैन्य पाठ की तरह पढ़ा। इस अध्ययन में अहम भूमिका मानी जाती है Mohammad Ali Jafari की, जिन्होंने बाद में एक नई सैन्य संरचना की कल्पना की।

‘मोजेक डिफेंस सिस्टम’ क्या है?

ईरान ने अपनी सेना को एक विशाल केंद्रीकृत ढांचे की बजाय छोटे-छोटे स्वतंत्र सैन्य नेटवर्क में बांट दिया। यह ढांचा मुख्य रूप से Islamic Revolutionary Guard Corps के तहत विकसित किया गया।

देश के 31 प्रांतों के आधार पर 31 अर्ध-स्वायत्त कमांड बनाए गए।

हर क्षेत्र को मिला अपना कमांड सेंटर, स्वतंत्र कम्युनिकेशन नेटवर्क, मिसाइल और ड्रोन स्टॉक, स्थानीय खुफिया तंत्र। मतलब साफ था…अगर केंद्रीय नेतृत्व टूट भी जाए तो युद्ध जारी रह सकता है।

‘ऑटोपायलट वॉर’ की अवधारणा

मोजेक डिफेंस को कई विश्लेषक “autopilot warfare model” भी कहते हैं। इसका मतलब यह कि स्थानीय कमांडर बिना केंद्रीय आदेश के भी पूर्व-निर्धारित रणनीति पर लड़ाई जारी रख सकते हैं। यह मॉडल पारंपरिक सैन्य ढांचे से बिल्कुल अलग है। यह ऐसा है जैसे किसी विशाल सेना को सैकड़ों छोटे लेकिन जीवित नेटवर्क में बदल दिया जाए। और यही कारण है कि बाहरी हमले के बावजूद सैन्य प्रतिरोध पूरी तरह खत्म नहीं होता।

भूगोल भी बना हथियार

ईरान की भौगोलिक संरचना भी इस रणनीति का हिस्सा है। ऊंचे पहाड़, विशाल रेगिस्तानी क्षेत्र और जटिल आंतरिक मार्ग किसी भी बाहरी सेना के लिए चुनौती बन सकते हैं। मोजेक डिफेंस इसी भूगोल का उपयोग करती है। रणनीति का उद्देश्य एक तेज युद्ध नहीं बल्कि लंबा, थका देने वाला संघर्ष बनाना है। जिसमें दुश्मन की तकनीकी ताकत धीरे-धीरे थकने लगे।

युद्ध का नया गणित

आधुनिक युद्ध अब सिर्फ टैंक और जेट का खेल नहीं रहा। यह नेटवर्क, रणनीति और विकेंद्रीकृत शक्ति का खेल बन चुका है। ईरान की मोजेक डिफेंस इसी बदलाव का उदाहरण मानी जा रही है। सैन्य विशेषज्ञ अजीत उज्जैनकर का मानना है कि यह मॉडल भविष्य के संघर्षों की झलक हो सकता है। जहां एक देश पूरी ताकत से हमला करता है…और दूसरा देश टूटने की बजाय बिखरकर लड़ता है।

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